मै तुझे अक्सर चांद कहता हुं 

जानता हु चांद भी पत्थर से बना है


तेरा मेरा एक दिन रिश्ता टूटेगा जरूर 

निभाने से ज्यादा उसमे जादा दिखावा है 


तू तो वजन में वैसे भी हलकी है 

मैने तो तुझसे ज्यादा भारी वक्त गुजारा है


शिकायत करकरके उन्होंने मार डाला 

मेरा गुनाह ये था कि मेरा जमीर जिंदा है


बाजारके अलावा कौन सा चॉईस है 

या खुद को बेचना या किसीको  खरीदना है


श्रीधर तिळवे नाईक 

(बाळबोध कविता या काव्यफायलीतून)

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